मेघालय में अवैध कोयला खदान में भीषण धमाका, 18 मजदूरों की मौत; मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका

शिलांग। मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले से गुरुवार को एक भीषण हादसे की खबर सामने आई है। जिले के दूरस्थ मयन्संगट थांगस्को क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट होने से कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई। प्रशासन को आशंका है कि मलबे में अभी और भी श्रमिक दबे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, कई एजेंसियां मौके पर तैनात
विस्फोट की सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता, फोरेंसिक टीम, राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन सेवा की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट के समय खदान के भीतर कितने मजदूर मौजूद थे, इसका स्पष्ट आंकड़ा अभी सामने नहीं आ सका है।

अब तक 16 शव बरामद, संख्या बढ़ने की आशंका
राज्य पुलिस महानिदेशक आई नोंगरांग ने बताया कि अब तक 16 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य मजदूरों की मौत इलाज के दौरान हुई है। तलाशी अभियान के दौरान और लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा सुबह के समय उस वक्त हुआ, जब खदान में अवैध कोयला खनन किया जा रहा था।

मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने जताया गहरा शोक
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को लेकर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी जयंतिया हिल्स में हुई इस दुखद घटना से वह बेहद आहत हैं और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस हादसे की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए हैं।

घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
पूर्वी जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि विस्फोट में घायल एक मजदूर को पहले सुतंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए शिलांग के अस्पताल में रेफर किया गया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि खदान अवैध रूप से संचालित की जा रही थी।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र में अवैध खनन के दौरान विस्फोट के कारण खदान ढह गई, जिससे कई मजदूर मलबे में दब गए। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी इसी क्षेत्र के थांगस्को गांव में हुए विस्फोट में दो खनिकों की जान चली गई थी।

रैट-होल माइनिंग पर पहले से है प्रतिबंध
गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अप्रैल 2014 में मेघालय में खतरनाक और अवैज्ञानिक ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद राज्य में अवैध कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियां लगातार सामने आती रही हैं। मेघालय हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ब्रोजेंद्र प्रसाद काटाके भी इस पर चिंता जता चुके हैं। मुख्यमंत्री संगमा पहले दावा कर चुके हैं कि अवैध खनन को लेकर 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बार-बार सवाल खड़े कर रही है।

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